पंडित संजय बंदोपाध्याय

वर्तमान में सिक्किम विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत पंडित संजय बंदोपाध्याय, पूर्व में रबीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकाता में उस्ताद अलाउद्दीन खां चेयर प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे हैं | आप एस.एम्.टैगोर सेंटर फॉर डॉक्यूमेंटेशन एंड रिसर्च इन लिन्गुइशिन्ग एंड ओब्सोलेसेंट म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स  [SMTC-DRLOMI] के संस्थापक एवं  निदेशक भी हैं| 
प्रोफेसर बंदोपाध्याय को यूजीसी एवं भारत सरकार द्वारा कई विश्वविद्यालयों के एक सलाहकार सदस्य के रूप में नामित किया गया है , साथ ही कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान परियोजनाओं में आपका सक्रिय योगदान रहा है। वैश्विक स्तर पर संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूरोपीय और अफ्रीकी देशों के शीर्ष विश्वविद्यालयों एवं  संगठनों में शैक्षणिक और कलात्मक दोनों क्षेत्रों में आपकी व्यापक उपस्थिति उल्लेखनीय है। आपकी उपलब्धियों में  फ़िनलैंड में यूनेस्को वैश्विक सम्मेलन में उनकी “प्लेनरी सत्र” की भागीदारी, उर्जाना के यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलिनोइस में “जॉर्ज ए मिलर विजिटिंग प्रोफेसर”, शिकागो विश्वविद्यालय में “आर्टिस्ट इन रेजिडेंस”, अलबर्टा विश्वविद्यालय में प्रतिष्ठित “इंडिया फोकस विजिटर” एवं  सैस्कैचेवान विश्वविद्यालय में द्विपक्षीय भारत-कनाडा सम्मेलन प्रमुख हैं|

पंडित संजय बंदोपाध्याय ने सेनिया-शाहजहाँपुर, इमदादखानी और रामपुर-सेनिया घरानों की समृद्ध वादन शैलियों  का व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। संगीत जगत के इन तीन अति प्रसिद्ध घरानों  की परम्पराओं एवं  ज्ञान का एक सुंदर संश्लेषण उनके सितार वादन में अनुभव किया जा सकता है।

आपकी सांगीतिक शिक्षा, पिता पं. पीयूष प्रसन्न बंदोपाध्याय के मार्गदर्शन में आरम्भ हुई । तत्पशचात् आपने पंडित राधिका मोहन मित्रा और पंडित बिमलेंदु मुखर्जी के अधीन सितार वादन का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। आपको पंडित मानस चक्रवर्ती और डॉ. एम. आर. गौतम से भी संगीत शिक्षा गृहण करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। साथ ही आप प्रोफेसर ध्रुव तारा जोशी, पंडित अजय सिन्हा रॉय, पंडित गजानन राव जोशी और पंडित शंकर घोष जैसे विद्वानों के सहज कृपापात्र रहे हैं|

आप आकाशवाणी के टॉप ग्रेड सितार वादक हैं एवं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आपकी लगभग एक दर्जन से अधिक व्यवसायिक रिकॉर्डिंग्स उपलब्ध हैं। भारत की RPG-HMV एवं अमेरिकी कम्पनी इंडिया आर्काइव म्यूज़िक लि॰ जैसी विख्यात कम्पनियों द्वारा आपके सी॰डी॰ प्रकाशित किए गए हैं। आपने भारत, अमेरिका, कनाडा, साउथ अफ़्रीका एवं यूरोपीय देशों के प्रमुख संगीत समारोहों एवं अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी है।
गुरु के रूप में पंडित बंदोपाध्याय ने उत्कृष्ट  शिष्य वृन्द का सृजन  किया है; जिनमें से कुछ ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में ख्यातिलब्ध कलाकारों की सूचि में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है। आपके शिष्यों में सर्वप्रमुख नाम श्री कुशल दास [सितार] का है,  जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सितार वादक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। अन्य शिष्यों में सुश्री राजरूपा चौधरी, उत्कृष्ट  सरोद वादिका, 14 वर्षीय विलक्षण बाल प्रतिभा आयुष घोष, उदयीमान सितार वादक श्री कल्याणजीत दास, प्रतिभावान युवा सरोद वादिका सुश्री त्रोइली  दत्ता और युवा बांसुरी वादक श्री पाँचजन्य  डे उल्लेखनीय हैं। आपके सान्निध्य में  अन्य उदयीमान कलाकार भी प्रगति पथ पर अग्रसर  हैं।
अनुलेखन : डॉ प्रज्ञा प्यासी